डीआरएस बनाम मैदानी फैसला: 2026 के 3 निर्णायक चरण
क्रिकेट में डीआरएस केवल तीसरे अंपायर को बुलाने का संकेत नहीं, बल्कि मैदानी फैसले की तकनीकी जांच की पूरी प्रक्रिया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी के नियमों के तहत बल्लेबाज या कप्तान आमतौर....
डीआरएस बनाम मैदानी फैसला: 2026 के 3 निर्णायक चरण
क्रिकेट में डीआरएस केवल तीसरे अंपायर को बुलाने का संकेत नहीं, बल्कि मैदानी फैसले की तकनीकी जांच की पूरी प्रक्रिया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी के नियमों के तहत बल्लेबाज या कप्तान आमतौर पर 15 सेकंड के भीतर समीक्षा मांग सकता है। हॉक-आई बॉल ट्रैकिंग एल्बीडब्ल्यू में गेंद का मार्ग दिखाती है, जबकि अल्ट्राएज बल्ले से संपर्क की आवाज पकड़ता है और हॉट स्पॉट टकराव का गर्म निशान दिखाता है। प्रत्येक टीम को प्रारूप और प्रतियोगिता की शर्तों के अनुसार सीमित रिव्यू मिलते हैं; टेस्ट और सीमित ओवरों के मैचों में संख्या अलग हो सकती है। एल्बीडब्ल्यू में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट—तीनों बिंदु देखे जाते हैं, तथा करीबी परिणाम पर अंपायर्स कॉल लागू हो सकती है। इसलिए रिव्यू लेने से पहले उपलब्ध तकनीक और मूल फैसले की स्थिति समझना सबसे समझदार कदम है।

क्रिकेट डीआरएस के शीर्ष 3 निर्णायक चरण
क्रिकेट में डीआरएस को समझने का सबसे साफ तरीका इसे तीन तकनीकी चरणों में बांटना है। पहला चरण मैदानी अंपायर का मूल फैसला और समय-सीमा है; दूसरा चरण गेंद, बल्ले और पैड से जुड़े सबूतों की जांच है; तीसरा चरण नियमों के अनुसार अंतिम निर्णय है। आईसीसी, मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब और प्रसारण तकनीक प्रदाता इन चरणों की विश्वसनीयता और संचालन को अलग-अलग भूमिकाओं से प्रभावित करते हैं।
- पहला चरण—रिव्यू का अनुरोध: कप्तान या आउट दिया गया बल्लेबाज 15 सेकंड के भीतर दोनों हाथों से “टी” संकेत करता है।
- दूसरा चरण—तकनीकी जांच: तीसरा अंपायर रीप्ले, अल्ट्राएज, हॉट स्पॉट और हॉक-आई का उपयोग करता है।
- तीसरा चरण—नियम आधारित फैसला: स्पष्ट गलती होने पर निर्णय बदलता है; अंपायर्स कॉल में मूल फैसला कायम रहता है।
सिर्फ धीमी गति का रीप्ले देखकर निर्णय बदलना पर्याप्त नहीं होता। गेंद का बल्ले से संपर्क, पैड पर लगने का स्थान, नो-बॉल की स्थिति और विकेट पर संभावित प्रभाव—इन सभी को क्रम में जांचना पड़ता है। यही कारण है कि डीआरएस “वीडियो रीप्ले” से कहीं अधिक नियंत्रित प्रक्रिया है।
डीआरएस के नियमों की आधिकारिक पृष्ठभूमि के लिए आईसीसी के खेल नियम और मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियम उपयोगी संदर्भ हैं।
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डीआरएस कैसे काम करता है?
डीआरएस का संचालन चार क्रमिक जांचों से होता है: रिव्यू की वैध मांग, प्रसारण रीप्ले, उपलब्ध तकनीकी प्रमाण और खेल नियमों के अनुसार अंतिम निर्णय। तीसरा अंपायर पहले यह देखता है कि समीक्षा समय पर मांगी गई थी या नहीं, फिर नो-बॉल, बल्ले का संपर्क, गेंद का पैड से टकराना और एल्बीडब्ल्यू की तीन शर्तों की जांच करता है। परिणाम मूल फैसला, फैसला बदलना या अंपायर्स कॉल हो सकता है।
मैदान पर फील्डिंग कप्तान तब रिव्यू मांगता है जब अंपायर ने अपील के बावजूद बल्लेबाज को आउट नहीं दिया हो। बल्लेबाज आउट दिए जाने पर समीक्षा की मांग कर सकता है, लेकिन संकेत कप्तान या नामित खिलाड़ी को निर्धारित समय में देना होता है। समीक्षा का अनुरोध होने के बाद तीसरा अंपायर पहले “फेयर डिलीवरी” और संभावित नो-बॉल की जांच कर सकता है, क्योंकि नो-बॉल होने पर कई आउट के विकल्प तुरंत समाप्त हो जाते हैं।
गेंद से बल्ले का संपर्क कैसे जांचा जाता है?
अल्ट्राएज या स्निकोमीटर गेंद और बल्ले के पास आने के क्षण की ध्वनि-तरंग दिखाता है। केवल आवाज सुनना पर्याप्त नहीं; ध्वनि का समय गेंद की दृश्य स्थिति से मेल खाना चाहिए। हॉट स्पॉट इन्फ्रारेड कैमरों से घर्षण का निशान खोजता है, लेकिन हर मैदान, गेंद की सतह और कैमरा व्यवस्था में इसका उपयोग समान रूप से उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं।
यहीं एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक अंतर सामने आता है: अल्ट्राएज ध्वनि-आधारित संकेत देता है, जबकि हॉट स्पॉट तापीय संकेत देता है। बल्ले का किनारा बहुत महीन हो तो एक तकनीक अस्पष्ट दिख सकती है और दूसरी अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। ईएसपीएनक्रिकइन्फो की मैच रिपोर्टों में अक्सर दर्शाया जाता है कि तीसरा अंपायर कई कोणों और तकनीकों को एक साथ देखकर निष्कर्ष तक पहुंचता है।

तकनीकी प्रमाण को समझने के लिए यह संबंधित सामग्री भी देखें: अल्ट्राएज और हॉट स्पॉट का अंतर
पहला चरण: रिव्यू का अनुरोध और समय-सीमा
रिव्यू का अनुरोध तभी मान्य होता है जब खिलाड़ी निर्धारित समय के भीतर स्पष्ट “टी” संकेत करे और टीम के पास रिव्यू शेष हो। 15 सेकंड की सीमा का उद्देश्य अनावश्यक देरी रोकना है; इस दौरान कप्तान साथी खिलाड़ियों, विकेटकीपर और गेंदबाज से संक्षिप्त सलाह ले सकता है। समय समाप्त होने के बाद किया गया संकेत सामान्यतः स्वीकार नहीं किया जाता, भले ही बाद में रीप्ले में फैसला संदिग्ध दिखे।
मैदानी अंपायर का फैसला रिव्यू की दिशा तय करता है। यदि बल्लेबाज को आउट दिया गया है, तो बल्लेबाज की टीम समीक्षा ले सकती है; यदि आउट नहीं दिया गया, तो फील्डिंग टीम समीक्षा मांग सकती है। टीम रिव्यू को केवल भावनात्मक अपील पर खर्च करे, यह रणनीतिक गलती है—विशेषकर टेस्ट मैच में जहां लंबी पारी के दौरान सीमित अवसर बचाने पड़ते हैं।
रिव्यू सफल होने पर या अंपायर्स कॉल आने पर उपलब्ध संख्या के नियम प्रतियोगिता के अनुसार अलग तरह से लागू हो सकते हैं। कई अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में असफल समीक्षा खत्म होती है, जबकि अंपायर्स कॉल समीक्षा की गिनती बचा सकती है। इसलिए प्रसारण ग्राफिक पर केवल “रिव्यू बचा है” देखना पर्याप्त नहीं; प्रतियोगिता की प्लेइंग कंडीशन्स भी देखनी चाहिए।
यहां एक कम चर्चित तथ्य महत्वपूर्ण है: गेंदबाज की नो-बॉल जांच अक्सर एल्बीडब्ल्यू या कैच की जांच से पहले होती है। यदि फ्रंट-फुट नो-बॉल साबित हो जाए, तो बल्लेबाज का आउट होना कई स्थितियों में अप्रासंगिक हो जाता है। यही क्रम डीआरएस को केवल अपील की समीक्षा नहीं, बल्कि घटना की कानूनी पुनर्रचना बनाता है।
अब रिव्यू संकेत और समय-सीमा के नियमों का संक्षिप्त संदर्भ सुरक्षित रखें।
दूसरा चरण: एल्बीडब्ल्यू में हॉक-आई की भूमिका
एल्बीडब्ल्यू समीक्षा में हॉक-आई गेंद की अनुमानित दिशा को तीन मुख्य सवालों से जोड़ता है: गेंद कहां पिच हुई, पैड पर प्रभाव कहां पड़ा और गेंद स्टंप पर लगती या नहीं। इन तीनों को आमतौर पर पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट कहा जाता है। यदि गेंद लेग स्टंप के बाहर पिच हुई हो, या प्रभाव विकेटों की सीमा से बाहर हो, तो एल्बीडब्ल्यू का फैसला नियमों के अनुसार बदल सकता है।
अंपायर्स कॉल का अर्थ यह नहीं कि तकनीक असफल रही। इसका अर्थ है कि बॉल ट्रैकिंग का अनुमान नियम में तय निर्णायक सीमा के बहुत करीब है, इसलिए मैदानी अंपायर का मूल फैसला बरकरार रहता है। उदाहरण के लिए, यदि मूल फैसला नॉट आउट था और गेंद का छोटा हिस्सा स्टंप को छूता दिखता है, तो नॉट आउट कायम रह सकता है; यदि मूल फैसला आउट था, तो आउट कायम रह सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य तकनीकी अनुमान को अंपायर के प्रत्यक्ष निर्णय के बराबर अधिकार देना है। हॉक-आई पिक्सेल-स्तर की दृश्य भविष्यवाणी नहीं, बल्कि कैमरा डेटा और गणितीय मॉडल पर आधारित प्रक्षेपण है। गेंद की गति, स्पिन, कैमरा कोण और ट्रैक किए गए फ्रेम परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए “लाल” या “हरा” ग्राफिक देखने से पहले मूल निर्णय और नियम-सीमा समझना जरूरी है।

एल्बीडब्ल्यू के तकनीकी विवरण के साथ एल्बीडब्ल्यू नियम और अंपायर्स कॉल की पूरी व्याख्या भी पढ़ें।
तीसरा चरण: अल्ट्राएज, हॉट स्पॉट और रीप्ले
अल्ट्राएज गेंद के बल्ले या दस्ताने के पास से गुजरने पर ध्वनि में अचानक बदलाव खोजता है। यदि ध्वनि-शिखर गेंद के बल्ले के किनारे से ठीक उसी समय मेल खाए, तो कैच या विकेटकीपर कैच की समीक्षा में यह मजबूत प्रमाण बन सकता है। फिर भी जूते की आवाज, बल्ले का जमीन से टकराना या पैड की हलचल जैसी बाहरी ध्वनियां भ्रम पैदा कर सकती हैं, इसलिए तीसरा अंपायर दृश्य रीप्ले और ऑडियो टाइमिंग दोनों मिलाता है।
हॉट स्पॉट इन्फ्रारेड तकनीक से टकराव के बाद सतह पर बने तापीय निशान को दिखाता है। यह खासकर तब उपयोगी हो सकता है जब किनारा बहुत पतला हो और आवाज स्पष्ट न हो, लेकिन इसका परिणाम कैमरा गुणवत्ता और उपकरण उपलब्धता पर निर्भर करता है। कई प्रसारणों में स्निकोमीटर और अल्ट्राएज प्रमुख साधन होते हैं, जबकि हॉट स्पॉट हर श्रृंखला में अनिवार्य नहीं होता।
डीआरएस में “अंपायर का फैसला” और “तकनीकी निष्कर्ष” अलग चरण हैं। तीसरा अंपायर मैदान के मूल निर्णय को तभी बदलता है जब उपलब्ध प्रमाण नियम के अनुरूप पर्याप्त रूप से स्पष्ट हो। यदि प्रमाण निर्णायक नहीं है, तो संदेह का लाभ मूल फैसले को मिलता है। यह सिद्धांत क्रिकेट में तकनीक और मानवीय निर्णय के बीच संतुलन रखता है।
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डीआरएस की सबसे आम गलतफहमियों को हटाने के लिए इस संक्षिप्त संदर्भ पर जाएं।
डीआरएस के शीर्ष 3 घटक कैसे चुने गए?
डीआरएस के निर्णय-प्रवाह, नियमों में भूमिका और दर्शक के व्यावहारिक संदर्भ को समझने के लिए ये तीन घटक प्रमुख माने जाते हैं। डीआरएस में रिव्यू संकेत, गेंद-ट्रैकिंग, संपर्क-साक्ष्य और अंतिम नियम-व्याख्या सभी अलग-अलग महत्व रखते हैं। यह क्रम दिखाता है कि डीआरएस में केवल तकनीक नहीं, बल्कि प्रक्रिया और निर्णय-सीमा भी बराबर निर्णायक हैं।
मूल्यांकन के मानदंड
- नियमों से संबंध: आईसीसी और एमसीसी की खेल-शर्तों के साथ संगतता।
- तकनीकी भूमिका: हॉक-आई, अल्ट्राएज और हॉट स्पॉट से मिलने वाले प्रमाण।
- निर्णय पर प्रभाव: क्या घटक मूल फैसला बदल सकता है या अंपायर्स कॉल लागू कर सकता है।
- दर्शक की समझ: प्रसारण ग्राफिक्स में परिणाम को स्पष्ट रूप से समझाने की क्षमता।
- रणनीतिक महत्व: कप्तान के लिए रिव्यू बचाने या खर्च करने का वास्तविक असर।
डीआरएस के संदर्भ में यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है: सबसे महंगी या सबसे चमकदार तकनीक हमेशा सबसे निर्णायक नहीं होती। एल्बीडब्ल्यू में हॉक-आई महत्वपूर्ण है, लेकिन गलत समय पर लिया गया रिव्यू, अस्पष्ट इम्पैक्ट या पहले से मौजूद नो-बॉल निर्णय पूरी समीक्षा को बदल सकता है। इसलिए मैच देखते समय केवल अंतिम रंगीन ग्राफिक नहीं, बल्कि जांच का क्रम भी पढ़ना चाहिए।
कौन-सा डीआरएस चरण सबसे महत्वपूर्ण है?
सबसे महत्वपूर्ण चरण वह है जो घटना के प्रकार से मेल खाता है: एल्बीडब्ल्यू में हॉक-आई, कैच में अल्ट्राएज और नो-बॉल विवाद में फ्रंट-फुट रीप्ले। कोई एक तकनीक हर फैसले का अंतिम उत्तर नहीं देती। सर्वश्रेष्ठ निर्णय वह है जिसमें मैदानी फैसला, सही तकनीकी प्रमाण और आईसीसी नियमों की सीमा एक साथ लागू हों।
यदि विकेटकीपर कैच की अपील है, तो पहले बल्ले से संपर्क की पुष्टि कीजिए। यदि पैड पर गेंद लगी है, तो पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट क्रम में देखिए। यदि रिव्यू में नो-बॉल का प्रश्न है, तो फ्रंट-फुट कैमरा निर्णायक हो सकता है। यही मैच-स्थिति आधारित दृष्टिकोण कप्तान को भावनात्मक अपील और वास्तविक प्रमाण के बीच अंतर समझने देता है।
2026 में डीआरएस पर चर्चा करते समय यह भी याद रखना चाहिए कि तकनीक का उद्देश्य अंपायर को हटाना नहीं, स्पष्ट गलती की संभावना कम करना है। आईसीसी की प्रतियोगिता-विशेष शर्तें रिव्यू की संख्या, उपलब्ध उपकरण और संचालन प्रक्रिया बदल सकती हैं। इसलिए भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या पाकिस्तान की किसी श्रृंखला में प्रसारण देखकर वही नियम हर स्थानीय प्रतियोगिता पर लागू मान लेना सही नहीं।
निष्कर्ष सीधा है: डीआरएस को “कौन सही था” की बहस की तरह नहीं, प्रमाणों की क्रमबद्ध जांच की तरह देखिए। पहले समय-सीमा और रिव्यू अधिकार जांचें, फिर नो-बॉल, बल्ले का संपर्क या एल्बीडब्ल्यू के तकनीकी बिंदु देखें। यही तरीका आपको टीवी ग्राफिक के बजाय वास्तविक क्रिकेट नियम समझने में बढ़त देता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट में डीआरएस क्या है?
उत्तर: डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी जांच करने की प्रक्रिया है। इसमें टीम निर्धारित समय के भीतर समीक्षा मांगती है और तीसरा अंपायर रीप्ले, हॉक-आई, अल्ट्राएज तथा उपलब्ध अन्य प्रमाणों से फैसला देखता है। एल्बीडब्ल्यू में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट तीन मुख्य बिंदु होते हैं। स्पष्ट गलती मिलने पर फैसला बदला जाता है, जबकि करीबी स्थिति में अंपायर्स कॉल लागू हो सकती है।
प्रश्न: डीआरएस लेने के लिए कितने सेकंड मिलते हैं?
उत्तर: सामान्यतः टीम को अंपायर के फैसले के बाद 15 सेकंड के भीतर “टी” संकेत करना होता है। कप्तान, विकेटकीपर और खिलाड़ी इस छोटी अवधि में निर्णय पर चर्चा कर सकते हैं, लेकिन समय समाप्त होने के बाद किया गया संकेत आमतौर पर स्वीकार नहीं होता। प्रतियोगिता की आधिकारिक प्लेइंग कंडीशन्स अंतिम नियम तय करती हैं, इसलिए आईसीसी या संबंधित बोर्ड का दस्तावेज देखना सबसे सुरक्षित है।
प्रश्न: डीआरएस में हॉक-आई और अल्ट्राएज में क्या अंतर है?
उत्तर: हॉक-आई गेंद के मार्ग और स्टंप तक पहुंचने की संभावना को मॉडल करता है, जबकि अल्ट्राएज गेंद और बल्ले के संपर्क से जुड़ी ध्वनि का विश्लेषण करता है। हॉक-आई एल्बीडब्ल्यू में मुख्य भूमिका निभाता है और अल्ट्राएज कैच या किनारे की जांच में उपयोगी होता है। दोनों तकनीकें अलग प्रमाण देती हैं और तीसरा अंपायर उन्हें दृश्य रीप्ले के साथ मिलाकर देखता है।
प्रश्न: रिव्यू असफल होने पर क्या होता है?
उत्तर: यदि समीक्षा मूल फैसले को गलत साबित नहीं कर पाती, तो टीम का रिव्यू प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार समाप्त हो सकता है। यदि परिणाम अंपायर्स कॉल हो, तो कई अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में रिव्यू बचा रहता है, हालांकि सटीक नियम प्रारूप और प्रतियोगिता पर निर्भर करते हैं। नो-बॉल, अस्पष्ट संपर्क और अपर्याप्त तकनीकी प्रमाण समीक्षा को असफल बना सकते हैं।
प्रश्न: अंपायर्स कॉल का मतलब क्या है?
उत्तर: अंपायर्स कॉल का अर्थ है कि तकनीकी परिणाम निर्णायक सीमा के इतना करीब है कि मैदानी अंपायर का मूल फैसला कायम रहता है। एल्बीडब्ल्यू में यह अक्सर इम्पैक्ट या विकेट की बॉल-ट्रैकिंग सीमा पर दिखाई देता है। इसका अर्थ यह नहीं कि हॉक-आई विफल हुआ; इसका अर्थ है कि नियम तकनीकी अनुमान के साथ मूल मानवीय निर्णय को प्राथमिकता देता है।
प्रश्न: क्या हर क्रिकेट मैच में डीआरएस उपलब्ध होता है?
उत्तर: नहीं, डीआरएस हर मैच में अनिवार्य रूप से उपलब्ध नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 प्रतियोगिताओं में आईसीसी या संबंधित क्रिकेट बोर्ड उपकरण, प्रसारण सुविधा और अंपायरिंग व्यवस्था के आधार पर इसे लागू करता है। स्थानीय क्रिकेट में हॉक-आई, अल्ट्राएज या तीसरे अंपायर की अनुपस्थिति के कारण डीआरएस नहीं मिल सकता, इसलिए मैच की शुरुआत में नियम जांचना जरूरी है।
पढ़ने के लिए धन्यवाद।
गेंदबाजी विश्लेषण · Editorial Archive · No. 01